कमरतोड़ महंगाई के बीच बिजली बिल से लगेगा करंट, महंगे कोयले का बोझ ग्राहकों पर डालने की तैयारी में सरकार

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Highlights

  • आयातित कोयले का भार उपभोक्ताओं पर ही डालने के लिए तैयार है सरकार
  • बिजली की बढ़ती मांग के कारण घरेलू कोयला आधारित इकाइयों पर दबाव
  • अगले कुछ महीनों में भारी भरकम बिजली बिल से आपकी आंखें चौंधिया सकती है

नयी दिल्ली। कमरतोड़ महंगाई की वजह से यदि आप अभी तक अपनी कमर सहला रहे थे तो अब कंधे और मजबूत करने का समय आ रहा है। अगले कुछ महीनों में  भारी भरकम बिजली बिल से आपकी आंखें चौंधिया सकती है। सरकार विदेशों से आ रहे महंगे कोयले का बोझ उपभोक्ताओं के कंधे पर डालने की तैयारी कर चुका है। 

घरेलू कोयले की किल्लत के कारण बिजली संकट गहराने की बढ़ती आशंका के बीच बिजली मंत्रालय ने उच्च कीमत वाले आयातित कोयले का भार उपभोक्ताओं पर ही डालने की राय का समर्थन किया है। केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार ने मंगलवार को कहा कि दिसंबर 2022 तक कुछ कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों के लिए आयातित कोयले पर आने वाली उच्च लागत का भार उपभोक्ताओं पर डालने देने पर सहमति बनी है। 

आयातित कोयले की बढ़ी मजबूरी 

उन्होंने कहा कि अगर आयातित कोयले पर आधारित बिजली संयंत्र पूरी क्षमता से नहीं चलेंगे, तो बिजली की बढ़ती मांग के कारण घरेलू कोयला आधारित इकाइयों पर दबाव पड़ेगा। इस कदम से बिजली की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी क्योंकि अडानी समूह, टाटा पावर और एस्सार जैसी आयातित कोयला आधारित इकाइयां बिजली पैदा करने और राज्य वितरण कंपनियों को बेचने में सक्षम होंगी। 

सरकार कर चुकी है तैयारी 

इस महीने की शुरुआत में बिजली मंत्री आर के सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में एस्सार के 1,200 मेगावाट के सलाया संयंत्र और मुंद्रा में अडाणी के 1,980 मेगावाट संयंत्र जैसी इकाइयों को शामिल करते हुए आयातित कोयले की ऊंची लागत को उपभोक्ताओं पर ही डालने को लेकर सहमति बनी थी।