कोरोना संकट में निवेश तोड़ने की जगह लें उसपर कर्ज, कम ब्याज पर मिलता है पैसा

निवेश पर कर्ज- India TV Paisa
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निवेश पर कर्ज

नई दिल्ली। कोरना संकट की वजह से अगर आपको पैसे की जरूरत है और आप किये जमे जमाये निवेश को तोड़ने का फैसला कर चुके हैं तो एक पल रुके। जानकार मानते हैं कि अपने किसी निवेश को तोड़ने की फैसला तब करना चाहिये जब आपके पास कोई अन्य विकल्प न बचा हो। क्योंकि ऐसा कर आप कई और फायदे खो सकते हैं।

क्यों गलत है निवेश बीच में तोड़ना

ट्रेडिंग को छोड़कर सभी निवेश एक समय सीमा से बंधे होते हैं, यानि आपको एक खास वक्त तक निवेश बनये रखने पर ही पूरा फायदा मिलता है। अगर आप समय से पहले निवेश तोड़ते हैं तो आपके काफी फायदे खत्म हो जाएंगे। अगर निवेश पर आपको कोई कवर मिलता है, तो आप उसे खो देंगे। बोनस जैसे फायदे भी आपसे छिन सकते हैं। कंपनियां और सरकार निवेश तोड़ने के इन्ही नुकसानों को जानती है, इसलिए कई तरह के निवेश पर कर्ज ऑफर किया जाता है जिससे की कोई भी मजबूरी में अपना नुकसान न करे। लोन अगेंस्ट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय संस्थान कुछ खास तरह के निवेश पर आकर्षक दर पर कर्ज ऑफर करते हैं। ये दरें आम पर्सनल लोन की दरों से कम होती हैं। 

बैंक एफडी पर कर्ज

– बैंक की एफडी पर कर्ज उस एफडी पर मिलने वाले ब्याज से कुछ ज्यादा होता है, हालांकि किसी भी हाल में ये दर आम पर्सनल लोन से कम ही रहती है। यानि पर्सनल लोन के मुकाबले एफडी पर कर्ज लेना हमेशा फायदे का सौदा होता है। 


– एफडी पर आप वैल्यू के 90 प्रतिशत तक कर्ज ले सकते हैं। अगर एफडी की वैल्यू 1 लाख रुपये है तो आप 90 हजार रुपये तक कर्ज ले सकते हैं। 


– जिस बैंक में आपने एफडी करायी उसकी शाखा पर जाकर आप कर्ज ले सकते हैं, या फिर आप ऑनलाइन कर्ज उठा सकते हैं। एफडी पर कर्ज एक सिक्योर्ड लोन है इसलिए ये आसानी से मिल जाता है। अधिकांश बैंक एफडी पर कर्ज ऑफर करते हैं। 

और किस निवेश पर मिलता है कर्ज


एचडीएफसी बैंक के मुताबिक म्युचुअल फंड, शेयर, एलआईसी, गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, किसान विकास पत्र, नाबार्ड के भविष्य निर्माण बॉन्ड, नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर शामिल हैं।

निवेश का कितना मिल सकता है कर्ज


– शेयर की मौजूदा कीमतों के 50 प्रतिशत


– इक्विटी म्युचुअल फंड के नेट एसेट वैल्यू का 50 प्रतिशत, डेट म्युचुअल फंड के एनएवी का 80 प्रतिशत 


– गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट का 70 प्रतिशत, एलआईसी के सरेंडर वैल्यू का 80 प्रतिशत


– बाकी के 65 प्रतिशत से ज्यादा के बराबर कर्ज