क्रिप्टोकरेंसी से मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का डर, सीतारमण ने दुनियाभर से की सख्ती की मांग

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Highlights

  • क्रिप्टोकरेंसी पर भारत ने अपनी चिंताओं से वैश्विक समुदाय को अवगत कराया
  • क्रिप्टोकरेंसी के जोखिम को अलग-अलग तरीके से देखने की जरूरत
  • बजट में 30 फीसदी की दर से टैक्स लगाया गया है क्रिप्टोकरेंसी पर

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग के जोखिम को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी को नियमित करने की एक सुदृढ़ योजना का सुझाव दिया है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि सीतारमण ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार की चिंताओं से भी वैश्विक समुदाय को अवगत कराया। वित्त मंत्री ने आईएमएफ द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जब तक क्रिप्टो परिसंपत्तियों की गैर-सरकारी गतिविधियां अनहोस्टेड वॉलेट के माध्यम से होंगी, उनका विनियमन बहुत कठिन होगा। 

देश के बाहर से बड़ा खतरा 

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, सेंट्रल बैंक द्वारा संचालित डिजिटल मुद्राओं के माध्यम से देशों के बीच सीमा पार से भुगतान बहुत प्रभावी हो जाएगा। उन्होंने कहा, मुझे गैर-सरकारी डोमेन पर जो जोखिम अधिक चिंतित करता है, वह यह कि आप दुनिया भर में सीमाओं के पार बिना होस्ट किए गए वॉलेट देख रहे हैं। इसलिए, किसी एक देश द्वारा अपने क्षेत्र के भीतर प्रभावी तरीके से विनियमन नहीं किया जा सकता है, और सीमापार विनियमन करने के लिए प्रौद्योगिकी के पास ऐसा कोई समाधान नहीं है, जो विभिन्न संप्रभु सरकारों को एक ही समय में प्रत्येक क्षेत्र में लागू होने के लिए स्वीकार्य हो।

जोखिम को अलग-अलग तरीके से देखने की जरूरत 

उन्होंने ‘मनी एट ए क्रॉसरोड: पब्लिक ऑर प्राइवेट डिजिटल मनी’ विषय पर एक चर्चा के दौरान कहा कि इसमें शामिल जोखिमों को अलग-अलग तरीके से देखना होगा, क्योंकि प्रत्येक उपयोगकर्ता के लिए जोखिम भी अलग हो सकते हैं। सीतारमण ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि नाइजीरिया के लिए विनियमन और जोखिम, एक पर्यटन या निवेश समृद्ध बहामास से अलग होगा। उन्होंने कहा कि धन शोधन का खतरा तब तक बना रहेगा, जब तक क्रिप्टोकरेंसी पर प्रौद्योगिकी को विनियमित करने और समझने के लिए एक वैश्विक दृष्टिकोण नहीं होगा। 

बजट में 30 फीसदी की दर से टैक्स लगाया 

उन्होंने कहा, बजट 2022-33 में हमने घोषणा की थी, कि इन क्रिप्टो संपत्तियों के लेनदेन से हुई आय पर 30 प्रतिशत कर लगाया जाएगा। साथ ही प्रत्येक लेनदेन के लिए भी स्रोत पर एक प्रतिशत कर कटौती की जाएगी, ताकि इसके माध्यम से हम यह जान सकें कि इसकी खरीद-बिक्री कौन कर रहा है।