देशभर में Lockdowns के बीच RBI ने EMI पर छूट देने से किया इनकार, कहा वर्तमान में लोन मोराटोरियम की आवश्‍यकता नहीं

Amid lockdowns RBI says no need for loan moratoriums - India TV Paisa
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Amid lockdowns RBI says no need for loan moratoriums

नई दिल्‍ली। पूरे देश में स्‍थानीय लॉकडाउन की बढ़ती संख्‍या के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा कि वर्तमान में लोन रिपेमेंट्स मोराटोरियम की कोई आवश्‍यकता नहीं है। उन्‍होंने कहा कि स्थिति के लिए कारोबार बेहतर तरीके से तैयार हैं। उल्‍लेखनीय है कि आरबीआई ने पिछले साल राष्‍ट्रीय लॉकडाउन की शुरुआत में छह माह के मोराटोरियम की घोषणा की थी।

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर को फैलने से रोकने के लिए पूरे महाराष्‍ट्र में लॉकडाउन है और राष्‍ट्रीय राजधानी सहित स्‍थानीय और नाइट कर्फ्यू देश के कई हिस्‍सों में लागू किया गया है। नए वित्‍त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा को जारी करने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए दास ने कहा कि आज की स्थिति में मोराटोरियम की कोई आवश्‍यकता नहीं है।

उन्‍होंने कहा कि कारोबार, विशेषकर प्राइवेट सेक्‍टर में, आज स्थिति से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं और वह अपनी गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने में सक्षम हैं। दास ने कहा कि आरबीआई ने महामारी के दौरान अर्थव्‍यवस्‍था में मदद के लिए पिछले साल कई नवोनेषी कदम उठाए हैं।   

उन्‍होंने कहा कि हम नियमित तौर पर असेट क्‍वालिटी डाटा की निगरानी करते हैं। किसी भी परिस्थिति में, केंद्रीय बैंक कोई झटके वाली प्रतिक्रिया नहीं देगा। हम कोई भी निर्णय लेने से पहले स्थिति, इसकी गहराई और प्रभाव का आकलन करेंगे।

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जो इन संस्थानों की व्यापक समीक्षा करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में तनावग्रस्त परिसंपत्तियों से निपटने के लिए परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी बनाने की घोषणा की थी।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि एआरसी की संख्या और आकार में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान में उसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल अभी तक नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि इसलिए वित्तीय क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में एआरसी के कामकाज की व्यापक समीक्षा करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जो वित्तीय संस्थाओं की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसी संस्थाओं को सक्षम बनाने के उपायों की सिफारिश करेगी। 

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