पहली तिमाही में सोने का आयात 94 प्रतिशत घटकर 68.8 करोड़ डॉलर पर

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नई दिल्ली। देश में सोने का आयात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 94 प्रतिशत घटकर 68.8 करोड़ डॉलर या 5,160 करोड़ रुपये पर आ गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी मिली है। सोना आयात देश के चालू खाते के घाटे (CAD) को प्रभावित करता है। कोविड-19 महामारी की वजह से सोने की मांग में गिरावट आई है, जिससे सोने का आयात भी नीचे आ गया है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में पीली घातु का आयात 11.5 अरब डॉलर या 86,250 करोड़ रुपये रहा था। इसी तरह तिमाही के दौरन चांदी का आयात भी 45 प्रतिशत घटकर 57.5 करोड़ डॉलर या 4,300 करोड़ रुपये रह गया।

सोने और चांदी के आयात में कमी से अप्रैल में देश का व्यापार घाटा (आयात और निर्यात का अंतर) कम होकर 9.12 अरब डॉलर रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 45.96 अरब डॉलर था। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि व्यापार घाटा कम होने से भारत ने जनवरी-मार्च की तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.1 प्रतिशत या 60 करोड़ डॉलर का चालू खाते का अधिशेष (Current Account Surplus) दर्ज किया। एक साल पहले समान अवधि में 4.6 अरब डॉलर या जीडीपी का 0.7 प्रतिशत का चालू खाते का घाटा दर्ज हुआ था।

पिछले साल दिसंबर से सोने का आयात लगातार घट रहा है। मार्च में सोने का आयात 62.6 प्रतिशत, अप्रैल में 99.93 प्रतिशत, मई में 98.4 प्रतिशत और जून में 77.5 प्रतिशत घटा था। भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोने का आयातक है। यहां मुख्य रूप से आभूषण उद्योग के लिए सोने का आयात किया जाता है। भारत सालाना 800 से 900 टन सोने का आयात करता है। हालांकि इस बार कोरोना संकट की वजह से आयात पर असर पड़ा है। फिलहाल सोने की निवेश मांग काफी ऊंचे स्तर पर है जिससे कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गई हैं। ऊंची कीमतों की वजह से ठोस सोने के खरीदार मार्केट में नहीं है। इसके साथ ही लॉकडाउन की वजह से ज्वैलर्स की दुकानों पर प्रतिबंध और शादियों की योजनाओं में बदलाव से भी मांग पर असर पड़ा है।