पीते हैं सिगरेट तो भरना पड़ेगा 50% तक ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम, छुपाया तो भारी नुकसान, जानिए क्यों?

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Highlights

  • सिगरेट पीने से लंग कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, टीवी जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है
  • बढ़े जोखिम को देखते हुए बीमा कंपनी 50 फीसदी तक ज्यादा प्रीमियम वसूलती है
  • इंश्योरेंस कंपनी से धूम्रपान की आदत को छुपाने पर दावा हो सकता है रद्द

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बाद इंश्योरेंस की अहमियत काफी बढ़ गई है। इसके चलते जीवन बीमा और हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अगर आप भी अपने लिए जीवन बीमा लेने का प्लान कर रहे हैं और सिगरेट पीते हैं तो हो जाइए सावधान! बीमा कंपनी आपसे 50 फीसदी तक ज्यादा प्रीमियम वसूल सकती है। इंश्योरेंस कंपनियां सामान्य व्यक्ति के मुकाबले धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं। सिगरेट पीने से लंग कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, टीवी जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी खतरे को देखते हुए बीमा कंपनियां ज्यादा प्रीमियम वसूलती है। 

सिगरेट पीने वाले पर ऐसे बढ़ता है प्रीमियम का बोझ 

अगर कोई 30 साल का व्यक्ति है और उसकी सालाना आय 10 से 15 लाख रुपये है। अगर वह वह सिगरेट नहीं पीता है और 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस लेना चाहता है तो उसे 12,173 रुपये का सालाना प्रीमियम चुकाना होगा। वहीं, अगर वह सिगरेट पीता है तो उसे 54 फीसदी अधिक प्रीमियम यानी 18,178 रुपये चुकाना होगा। यानी सिगरेट पीने वाले व्यक्ति को हर महीने करीब 600 रुपये अधिक प्रीमियम चुकाना होगा। 

क्यों प्रीमियम पर होता है असर 

इंश्योरेंस कंपनियों के नियमों के मुताबिक ग्राहक के जीवन कवर का पॉलिसी प्रीमियम जॉब प्रोफाइल से ज्यादा धूम्रपान की आदत से अधिक प्रभावित होता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को गंभीर बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। इसके चलते बीमा कंपनियां जोखिम को देखते हुए अधिक प्रीमियम वसूलती है। कम जोखिम वाले जॉब प्रोफाइल वाले लोगों (सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बैंकर और मार्केटिंग कंसल्टेंट) के लिए जीवन बीमा प्रीमियम उच्च जोखिम वाले जॉब प्रोफाइल वाले पेशेवरों के मुकाबले कम होता है। 

जानकारी नहीं देने पर दावा हो सकता है रद्द

कई बार सिगरेट पीने वाल लोग महंगे प्रीमियम से बचने के लिए पॉलिसी जारी करने के समय बीमा कंपनी से अपनी धूम्रपान की आदतों का खुलासा नहीं करते हैं। ऐसा होन पर बीमा दावा करते समय कंपनी को जानकारी मिलती है तो वह आपके दावा को रद्द भी कर सकती है। कई बार कंपनियां मेडिकल टेस्ट भी कराने का विकल्प देती हैं।