शेयर बाजार में अगले हफ्ते गिरावट जारी रहेगी या लौटेगी तेजी? जानिए, क्या कह रहे हैं मार्केट एक्सपर्ट

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Highlights

  • मंथली डेरिवेटिव एक्सपायरी के चलते उतार-चढ़ाव रहने की संभावना
  • एचडीएफसी लाइफ, बजाज ऑटो, अंबुजा सीमेंट, एक्सिस बैंक के नतीजे आएंगे
  • विदेशी निवेशकों की चाल पर भी बाजार की दिशा तय होगी

नई दिल्ली। बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंतिम कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 714 अंक गिरकर बंद हुआ। ऐसे में सोमवार से शुरू हो रहे कोराबारी सप्ताह में बाजार की चाल कैसी रहेगी इसको लेकर निवेशकों में उहापोह की स्थिति हैं। अगर, आप भी बाजार की चाल को लेकर सशंकित हैं तो हम विशेषज्ञों की राय के हवाले से आपको बता रहे हैं कि सोमवार से शेयर बाजार की चाल कैसी रह सकती है। आइए, जानते हैं कि अगले हफ्ते बाजार की चाल को लेकर विशेषज्ञों का क्या कहना है?  

मंथली एक्सपायरी के चलते उथल-पुथल की संभावना 

मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि मंथली डेरिवेटिव एक्सपायरी के चलते इस सप्ताह शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव रह सकता है। इसके साथ ही वैश्विक रुझानों के साथ-साथ कंपनियों के तिमाही नतीजें बाजार को प्रभावित करेंगे। विदेशी निवेशकों के रुझान पर भी नजर रखेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के ऐलान के बाद सोमवार से बाजार की शुरुआत कमजोर हो सकती है। यानी बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है। 

कंपनियों के नतीजे पर बहुत कुछ निर्भर 

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख, संतोष मीणा ने कहा कि बाजार सोमवार को आईसीआईसीआई बैंक के परिणामों पर प्रतिक्रिया देगा जबकि एचडीएफसी लाइफ, बजाज ऑटो, एचयूएल, अंबुजा सीमेंट, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, वेदांत, इंडसइंड बैंक, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और विप्रो के नतीजे अगले सप्ताह आएंगे। ये भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे। अगर, कंपनियों के नतीजे बेहतर रहें तो बाजार में तेजी देखने को मिलेगी अन्यथा बाजार में कमजोरी आ सकती है। मीणा ने कहा कि एफआईआई भारतीय इक्विटी बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं और अमेरिका में आक्रामक दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं के बीच उनकी चाल भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

वैश्विक बाजार की चाल का भी असर होगा 

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के खुदरा अनुसंधान प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली और कुछ दिग्गजों के कमजोर नतीजों ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी फेड के ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान, बढ़ती महंगाई और बॉन्ड प्रतिफल, धीमी आर्थिक विकास, यूक्रेन में लंबे समय तक युद्ध और अस्थिर कच्चे तेल की कीमतें बाजारों पर नकारात्मक असर डालेंगे। 

निवेशकों को क्या करना चाहिए? 

जूलियस बेयर के कार्यकारी निदेशक, मिलिंद मुछला ने कहा कि निवेशक बाजार में आने वाले तिमाही नतीजों की घोषणा का इंतजार करेंगे। ऐसे में छोटे निवेशकों को अभी वेट एंड वाच करना चाहिए। बाजार गिरने पर निवेश करने से बचना चाहिए। मुछला ने कहा, इसके अलावा, भू-राजनीतिक स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला चुनौतियों के कारण बढ़ी हुई कमोडिटी की कीमतों की आसन्न चिंताओं और यूएस फेड द्वारा कठोर बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों के साथ, बाजार में निकट अवधि में बड़ा उतार-चढ़ाव देखी जा सकती है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन संकट पर अपडेट जैसे वैश्विक संकेत, और चीन की COVID स्थिति भी निवेशकों के रडार पर रहेगी।