Davos 2022: गौतम अडाणी ने कहा, मुश्किल समय में भी आगे बढ़ सकता है भारत

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Founder and the Chairman of the Adani Group Gautam Adani.

Highlights

  • मुझे यह मानना होगा कि WEF में भारत की बहुत बड़ी उपस्थिति, वर्तमान समय में भी आश्वस्त करने वाली थी: अडाणी
  • अडाणी ने विपरीत परिस्थितियों के बीच भी बढ़ते कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि मुश्किल समय में भी, भारत आगे बढ़ सकता है।

Davos 2022: दावोस शिखर सम्मेलन 2022 में हिस्सा लेकर लौटे देश के अग्रणी उद्योगपति गौतम अडाणी ने इस बारे में एक ब्लॉग में अपने विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि इस साल का सम्मेलन बेहद दिलचस्प रहा है। अडाणी ने विपरीत परिस्थितियों के बीच भी बढ़ते कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि मुश्किल समय में भी, भारत आगे बढ़ सकता है, और दावोस में भारत की उपस्थिति बढ़ते आत्मविश्वास को प्रदर्शित करती है।

‘इतिहास वास्तव में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर’

गौतम अदाणी ने कहा कि 2 साल कोरोना महामारी को प्रकोप झेलने के बाद आखिरकार विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक महत्वपूर्ण विषय के साथ हो रही है। दावोस में इस बार की थीम ‘एक महत्वपूर्ण मोड़ पर इतिहास: सरकारी नीतियां और व्यावसायिक रणनीतियां’ (‘History at a Turning Point: Government Policies and Business Strategies’) रही। अडाणी ने कहा कि इतिहास वास्तव में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। जलवायु परिवर्तन, उसके बाद कोरोना महामारी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अब रूस-यूक्रेन युद्ध जिससे की महंगाई बेलगाम हो गई।

‘भारत की उपस्थिति आश्वस्त करने वाली थी’


अपने अनुभव को साझा करते हुए अडाणी ने कहा, ‘मुझे यह मानना होगा कि WEF में भारत की बहुत बड़ी उपस्थिति, वर्तमान समय में भी आश्वस्त करने वाली थी। इसने दिखाया कि भारत अब वैश्विक क्षेत्र में खुद को मुखर करने से नहीं कतराता है। यह हमारे बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत था। यह भारत की कहानी में हमारे विश्वास का संकेत था, और मुझे खुशी है कि मैं दावोस में अपने लिए इसका अनुभव करने के लिए था। भारत को आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करने का अधिकार है, जबकि विकल्पों की जरूरत वाले विश्व के लिए एक विकल्प प्रदान करने की भी मांग कर रहा है।’

अडाणी ने हरित समाधानों के बारे में भी की बात

अडाणी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा है कि दावोस में जिन कई प्रतिनिधियों से मैं मिला, उन्होंने जलवायु परिवर्तन से अधिक जिस विषय पर चर्चा की वह मुद्दा था रक्षा। जाहिर है, यूक्रेन में युद्ध के साथ-साथ मध्य एशिया और मध्य पूर्व से सैनिकों की वापसी से दुनिया हिल गई है। अपने अनुभवों में अडाणी ने हरित समाधानों की भी बात की है और कहा है कि हरित समाधानों और प्रौद्योगिकियों के पक्ष में एक बदलाव आया है, जो अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में थे और यह नाजुकता यूक्रेन में संकट से पूरी तरह से उजागर हो गई है।