Railway Cancel Trains: देश में बिजली संकट के बीच रेलवे का बड़ा कदम, गर्मी की छुट्टी से पहले कैंसल की 670 रेलगाड़ियां

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Highlights

  • रेल रूट को खाली रखने के लिए रेलवे ने 670 सवारी गाड़ियों को रद्द कर दिया
  • रेलवे के मुताबिक 24 मई तक 670 पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है
  • रेलवे की हर मालगाड़ी करीब 3,500 टन कोयला ढोने में सक्षम है

Railway cancel train: देश मौजूदा दौर में भीषण बिजली संकट से जूझ रहा है। भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है। इस मांग को पूरा करने के लिए बिजली घरों की भट्टियां पूरे जो रे धधक रही हैं, लेकिन फिर भी डिमांड पूरी कर पाना मुश्किल हो रहा है। अप्रैल में बिजली की मांग में अचानक तेजी से बिजली घरों के सामने कोयले का संकट भी पैदा कर दिया है। इस कमी को पूरा करने के लिए रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है। 

एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के अनुसार मा​लगाड़ियों के लिए रेल रूट को खाली रखने के लिए रेलवे ने 670 सवारी गाड़ियों को रद्द कर दिया है। बता दें कि कोयले की मांग को पूरा करने के लिए झारखंड छत्तीसगढ़ और अन्य कोयला उत्पादक राज्यों की खदानों से रेलगाड़ियां देश के हर कोने में मौजूद ताप बिजली घरों तक कोयला पहुंचा रही हैं। कोयले की इस बढ़ी मांग पूरा करने के लिए कोलफील्ड के साथ ही रेलवे पर भी दबाव बढ़ गया है। 

24 मई तक ठप रहेंगी रेलगाड़ियां

कोयले लदी मालगाड़ियों को निर्बाध रूप से रास्ता देने के लिए रेलवे ने सवारी गाड़ियां कैंसिल करनी शुरू की है। रेलवे के मुताबिक 24 मई तक 670 पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। इनमें से 500 से अधिक ट्रेनें लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें हैं। 

400 मालगाड़ियों से कोयले की ढुलाई

हाल ही में कोयला मंत्री ने कहा था कि देश के बिजली घरों में औसतन 10 दिनों का कोयला भंडार मौजूद है। सरकार का लक्ष्य है इस रिजर्व को मेंटेन रखा जाएं। यही ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कोयला लदी मालगाड़ियों की औसत संख्या भी बढ़ा दी है। फिलहाल रोजाना 400 से ज्यादा कोयला लदी ट्रेनों को चलाया जा रहा है। यह पिछले पांच साल में सबसे अधिक संख्या है।

हर रेलगाड़ी की क्षमता 3500 टन 

सूत्रों के मुताबिक रेलवे की हर मालगाड़ी करीब 3,500 टन कोयला ढोने में सक्षम है। पावर प्लांट्स में कोयले का भंडार बढ़ाने के लिए कम से कम और दो महीने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी। इससे पावर प्लांट्स के पास पर्याप्त कोयला भंडार रहेगा और जुलाई-अगस्त में संकट को टाला जा सकेगा। जुलाई-अगस्त में बारिश के कारण कोयले के खनन सबसे कम होता है।