Rupee Crashes: रिकॉर्ड गिरावट के बाद रुपया एतिहासिक स्तर पर लुढ़का, घर के बजट पर पड़ेगी महंगाई की मार

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Highlights

  • रुपया अपने सर्वकालिक न्यूनतम स्तर 77.63 रुपये पर पहुंचा गया
  • रुपया 25 पैसे की जोरदार गिरावट के साथ 77.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ
  • वैश्विक बाजारों में डॉलर के दो दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया

Rupee Crashes: आपसे यदि अपने घर का बजट अभी संभल नहीं रहा है, तो सावधान हो जाइए। महंगाई की सुनामी दस्तक देने लगी है। सोमवार को एतिहासिक स्तर पर गिरने के बाद हफ्ते में दूसरी बार रुपये ने गिरावट का रिकॉर्ड बनाया है। आज दिन के कारोबार में रुपया अपने सर्वकालिक न्यूनतम स्तर 77.63 रुपये पर पहुंचा गया। 

रुपये की गिरावट से आयात होने वाला सामान महंगा होगा। सबसे बुरा असर पेट्रोल डीजल पर पड़ेगा वहीं विदेशों से आने वाले मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंज्यूमर ड्यूरेबल जैसे टीवी, फ्रिज, ऐसी महंगे हो जाएंगे। जो सामान भारत में बनते हैं उनके आयातित कलपुर्जे महंगे होने से कीमतों पर महंगाई की मार पड़ेगी। 

क्या है रुपया गिरने का कारण 

अमेरिका के ऊंचे मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद ब्याज दर में आक्रामक वृद्धि की आशंका तथा जोखिम उठाने की धारणा में सुधार के बीच वैश्विक बाजारों में डॉलर के दो दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसका असर भारत सहित दुनिया भर के बाजार पर देखने को मिला है। 

गर्त में रुपया

बृहस्पतिवार को रुपया 25 पैसे की जोरदार गिरावट के साथ 77.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले दो दिन तक रुपये ने बढ़त दर्ज की थी। घरेलू शेयर बाजार में हानि दर्ज होने, कमजोर आर्थिक वृद्धि दर तथा विदेशी पूंजी की सतत निकासी ने कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी को नजरअंदाज किया। इसकी वजह से रुपया 77.63 प्रति डॉलर के एक दिन के कारोबार के दौरान रिकॉर्ड निचले स्तर तक गया। 

77.50 पर बंद हुआ रुपया

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 77.52 प्रति डॉलर पर बेहद कमजोर खुला तथा कारोबार के दौरान 77.36 से 77.63 रुपये के दायरे में उतार-चढ़ाव के बाद अंत में 25 पैसे की जोरदार गिरावट के साथ 77.50 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। रुपये का पिछला बंद भाव 77.25 रुपये प्रति डॉलर था। 

9 मई का रिकॉर्ड टूटा 

इससे पहले नौ मई को डॉलर के मुकाबले रुपया 77.44 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शाोध विश्लेषक, दिलीप परमार ने कहा, ‘‘भारतीय रुपये ने एक मजबूत डॉलर इंडेक्स और जोखिम उठाने की धारणा में सुधार के कारण 77.63 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर को छुआ।’’ 

डॉलर इंडेक्स दो दशकों के उच्च स्तर पर 

छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती को आंकने वाला डॉलर सूचकांक 104.51 के दो दशक के नये उच्चस्तर पर जा पहुंचा। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 105.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 

रुपये में कमजोरी का आपकी जेब पर असर 

विदेशों में बच्चों को पढ़ाना और घूमना महंगा होगा: भारत में उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का चलन बहुत पुराना है। भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप जाते हैं। रुपये की गिरावट भारत में विदेश-शिक्षा के इस रुझान पर बड़ा असर डालेगा क्योंकि अब समान शिक्षा के लिए पहले की तुलना 15 से 20 फीसदी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। 

महंगाई और बढ़ जाएगी: रुपये टूटने से भारत में महंगाई और बढ़ जाएगी। पेट्रोल-डीजल से लेकर तमाम जरूरी के सामान के दाम बढ़ने स महंगाई बढ़ेगी। वहीं, दिनों-दिन रुपए की बिगड़ रही हालत निवेशकों को भारतीय अर्थव्यवस्था के हालात के संकेत भी दे रही है। इससे निवेशकों के रुख पर भी बुरा असर होगा। 

आयात बिल बढ़ेगा: रुपये की कमजोरी से सबसे ज्यादा नुकसान कच्चे तेल के आयात पर होगा। कच्चे तेल का आयात बिल में बढ़ोतरी होगी और विदेशी मुद्रा ज्यादा  खर्च करना होगा। 

इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे होंगे: रुपये की कमजोरी से इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र को नुकसान होगा, क्योंकि महंगे इलेक्ट्रॉनिक गु्ड्स आयात करने होंगे। नकारात्मक असर जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर पर दिखाई देगा।

उर्वरक की कीमत बढ़ेगी: भारत बड़ी मात्रा में जरूरी उर्वरकों और रसायन का आयात करता है। रुपये की कमजोरी से यह भी महंगा होगा।